me ajh jeb ton gareeb jaroor hoeyaa haa
par dil ton gareeb nahi hoeyaa
ਮੈਂ ਅੱਜ ਜੇਬ ਤੋਂ ਗਰੀਬ ਜਰੂਰ ਹੋਇਆ ਹਾਂ
ਪਰ ਦਿਲ ਤੋਂ ਗਰੀਬ ਨਹੀਂ ਹੋਇਆ।
me ajh jeb ton gareeb jaroor hoeyaa haa
par dil ton gareeb nahi hoeyaa
ਮੈਂ ਅੱਜ ਜੇਬ ਤੋਂ ਗਰੀਬ ਜਰੂਰ ਹੋਇਆ ਹਾਂ
ਪਰ ਦਿਲ ਤੋਂ ਗਰੀਬ ਨਹੀਂ ਹੋਇਆ।
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
bewafai kr gye|sad shayari
Tod gye oh v dil dujeya di trah..
Kde pushde c menu..
eh bewfai kisnu kehnde ne..??
