Rooh khush Howe taan dard vi mithde mithde jaapn ji
Man uth jawe taa khushiya vi fer zehar hi lag diyan..!!
“Roop” rakh bacha ke zindarhi nu fir Russ hi jawe na
Lag na jawan hundiya nazra buriya jagg diyan🙌..!!
ਰੂਹ ਖੁਸ਼ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਰਦ ਵੀ ਮਿੱਠੜੇ ਮਿੱਠੜੇ ਜਾਪਣ ਜੀ
ਮਨ ਉੱਠ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਵੀ ਫਿਰ ਜ਼ਹਿਰ ਹੀ ਲੱਗ ਦੀਆਂ..!!
“ਰੂਪ” ਰੱਖ ਬਚਾ ਕੇ ਜ਼ਿੰਦੜੀ ਨੂੰ ਫਿਰ ਰੁੱਸ ਹੀ ਜਾਵੇ ਨਾ
ਲੱਗ ਨਾ ਜਾਵਣ ਹੁੰਦੀਆਂ ਨਜ਼ਰਾਂ ਬੁਰੀਆਂ ਜੱਗ ਦੀਆਂ🙌..!!
हमने डूबते सूरज की एक शाम को अपना किरदार बदल डाला,
के उस मोहब्बत की चुभन को शायरी का नजमा दे डाला,
लोग मेरी तकरीरों पर वाह वाही दे रहे थे,
भीड़ में कुछ लोग ताली बजाकर, तो कुछ लोग अपनी नाकाम मोहब्बत की दलील दे रहे थे।
महफिल के शोर से एक जानी पहचानी सी आवाज आई,
तू आज भी आगे नहीं बढ़ा की उसने गुहार लगाई,
उसकी इस शिकायत में परवान था पुराने यारो का ।
मै हैरान था कौन था यह शक्स
अनजानों की भीड़ में जिसने मेरे शब्दो में छुपी नाकाम मोहब्बत को पहचाना था,
मुस्कुराता हुआ सामने आया तब समझ आया अरे यह तो यार पुराना था।