

Kujh kise dil de
kujh kagzaan te hameshan aabaad rave
kive bhul jawaan me us nu
jo har saah vich yaad rave
ਕੁਝ ਕਿਸੇ ਦਿਲ ਦੇ
ਕੁਝ ਕਾਗਜ਼ਾਂ ਤੇ ਹਮੇਸ਼ਾਂ ਆਬਾਦ ਰਵੇ
ਕਿਵੇਂ ਭੁਲ ਜਾਵਾਂ ਮੈਂ ਉਸ ਨੂੰ
ਜੋ ਹਰ ਸਾਹ ਵਿੱਚ ਯਾਦ ਰਵੇ
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।