Main khush hu mujhe khush rehne do,
Main dur hu mohabbaton ke wehamon se mujhe dur rehne do….!!!
मैं खुश हूं मुझे खुश रहने दो,
मैं दूर हूं मोहोब्बतों के वहमों से मुझे दूर रहने दो….!!!
Main khush hu mujhe khush rehne do,
Main dur hu mohabbaton ke wehamon se mujhe dur rehne do….!!!
मैं खुश हूं मुझे खुश रहने दो,
मैं दूर हूं मोहोब्बतों के वहमों से मुझे दूर रहने दो….!!!
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
”Are gairo se ladkar kya jatana chahte hai aap ke gairo se ladkar kya jatana chahte hai aap?… Kya parayo se ladkar apna banna chahte hai aap?… Apna toh manege ham tab jab apno ke vesh me un parayo ka parda hatayege aap…”