Khud nu kar buland inna
ke har takdeer ton pehlan
khuda v puchhe tainu
ke teri takdeer hai ki bandeya
ਖੁਦ ਨੂੰ ਕਰ ਬੁਲੰਦ ਇੰਨਾ
ਕਿ ਹਰ ਤਕਦੀਰ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ
ਖੁਦਾ ਵੀ ਪੁੱਛੇ ਤੈਨੂੰ
ਕਿ ਤੇਰੀ ਮਰਜ਼ੀ ਹੈ ਕੀ ਬੰਦਿਆ
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..