ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
Chan sharmaya,
Jad tare takkn lagge🙈
Es nacheez nu dekh,
Mehla vale Hassn lagge🙂
Teri Ada nu dekh
Panchi bhole diggan lagge😍
Mil jawe tu menu
Bin kande full laggan lagge😇
ਚੰਨ ਸ਼ਰਮਾਇਆ,
ਜਦ ਤਾਰੇ ਤੱਕਣ ਲੱਗੇ।🙈
ਇਸ ਨਾਚੀਜ ਨੂੰ ਦੇਖ,
ਮਹਿਲਾ ਵਾਲੇ ਹੱਸਣ ਲੱਗੇ।🙂
ਤੇਰੀ ਅਦਾ ਨੂੰ ਵੇਖ,
ਪੰਛੀ ਭੋਲੇ ਡਿੱਗਣ ਲੱਗੇ।😍
ਮਿਲ ਜਾਵੇ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ,
ਬਿਨ ਕੰਢੇ ਫੁੱਲ ਲੱਗਣ ਲੱਗੇ।😇