MANZIL HAI DUR BAHUT
KOSHISH MAGAR KAR TO SAHI
MANA MUSHKIL HAI SAFAR
EK KADAM CHAL KE DEKH TO SAHI
– AMRUTA
MANZIL HAI DUR BAHUT
KOSHISH MAGAR KAR TO SAHI
MANA MUSHKIL HAI SAFAR
EK KADAM CHAL KE DEKH TO SAHI
– AMRUTA
बिछड़ते वक्त,एक दर्द और दे गया
दिल में रहा,फिर दिल ही ले गया
अब खाली बादल है, ज़िंदगी मेरी
वो सर्दी गर्मी, सारे मौसम ले गया
यही सोच कर रोता हूं, अक्सर मैं
किस जगह अपने, कदम ले गया
छोटी-छोटी बात,सोचने वाला मैं
क्यूं बड़ा फैसला, एकदम ले गया
तोहफ़े भी लिए, और दिए बहुत
वो खुशी ले गया, मैं गम ले गया
और फिर होतीं रहीं, बारिशे वहां
मैं जहां से भी आंखें, नम ले गया
सेंटीमेंट आग से भी भयंकर।
आग जलाता है बाहर से, लेकिन वो रुलाता है अंदर।
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जिनको जल जाना होता है, उनको कौन रोकेगा।
ये आग नहीं, प्यार का अल्फा ओमेगा।
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जिंदगी नाव है, समय माझी।
बहता हु में, लहर की आवाज़ सुनोजी।
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लोग कहते है प्यार के साथ कविता जुड़े है।
प्यार जिंदगी का दूसरा नाम और जिंदगी कविता की रूप है।
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बहुत लोगों का प्यार टूट जाता है।
जीवन के साथ प्यार होता है समय का, यही प्रगति है।
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जिंदगी के मैदान में कितने सारे हीरो खेलते है।
लेकिन सिर्फ एक विजेता इतिहास लिखते है।
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खुद को समझाओ, किसी को समझाना मुश्किल।
समय अदालत है, और वक्त वकील।
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कोरोना घातक है, लेकिन दरिद्रता नियति।
रोग में मरे बहुत, अब भूख के अगन में आत्माहुति।
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रिश्ते लहर की तरह।
उठती है, गिरती है, टूटती हे धारा।
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घर में लक्ष्मी है तो सब कुछ है।
धन उनकी रूप और सम्पद उनकी रूह है।