MANZIL HAI DUR BAHUT
KOSHISH MAGAR KAR TO SAHI
MANA MUSHKIL HAI SAFAR
EK KADAM CHAL KE DEKH TO SAHI
– AMRUTA
MANZIL HAI DUR BAHUT
KOSHISH MAGAR KAR TO SAHI
MANA MUSHKIL HAI SAFAR
EK KADAM CHAL KE DEKH TO SAHI
– AMRUTA
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
Rabb!! ik gal das
tu sachi aina gareeb aa?
kyuki tu mere ton hi cheez kho laina
jehrri mere sab to jyaada kareeb aa
ਰੱਬਾ !!! ਇਕ ਗੱਲ ਦੱਸ🧐
ਤੂੰ ਸੱਚੀ ਐਨਾ ਗਰੀਬ ਆ?🤨
ਕਿਉਕਿ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਹੀ ਚੀਜ ਖੋ ਲੈਣਾ😩
ਜਿਹੜੀ ਮੇਰੇ ਸਬ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਕਰੀਬ ਆ💔