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ek kadam chal kar || Motivational shayari

MANZIL  HAI  DUR  BAHUT
KOSHISH  MAGAR  KAR  TO  SAHI
MANA  MUSHKIL  HAI  SAFAR
EK  KADAM  CHAL  KE  DEKH  TO  SAHI

                                         – AMRUTA

Title: ek kadam chal kar || Motivational shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Jaroori hai || Hindi shayari

Haan hr baar byan nahi hoti chizein,
Kbhi kbhi dil mei chupakr rkhna b jruri hai..
Haan koshish ki jaye to ho skta hai,
Kuch apno se fasla bnakr rkhna bhi jruri hai..
Zindgi bhr ka sath dena, Vada krte hain, kehna jruri nahi,
Par bin kahe aakr sath nibhana to ho skta hai..
Haan shayad tumhe namnjoor hi sahi,
Par kbhi kbhi apna kehne wale ko gale lgana bhi jruri hai..
Tmaam zindgiyan yhan, Chan Minto m khtm ho jati hai,
Maut to aygi hi ,Par maut tk ka safar agr teh kr jao,
To ye zindgi bitana ik hasrat sa hai..
Haan baatein meri bhle achi na lge,
Sach to hai yahi……is duniya mei,
Jise chaho usse rulana bhi jruri hai..
Beintehaan na sahi bhale thoda hi hai, Aitbaar to kro kisi par ,Haan thoda dr lgega ,
Par kisi gair ko apna kissa sunana bhi jruri hai..
Jruri hai ..

Title: Jaroori hai || Hindi shayari


ऊंट की गर्दन || birbal and akbar story hindi

बीरबल की सूझबूझ और हाजिर जवाबी से बादशाह अकबर बहुत रहते थे। बीरबल किसी भी समस्या का हल चुटकियों में निकाल देते थे। एक दिन बीरबल की चतुराई से खुश होकर बादशाह अकबर ने उन्हें इनाम देने की घोषणा कर दी।

काफी समय बीत गया और बादशाह इस घोषणा के बारे में भूल गए। उधर बीरबल इनाम के इंतजार में कब से बैठे थे। बीरबल इस उलझन में थे कि वो बादशाह अकबर को इनाम की बात कैसे याद दिलाएं।

एक शाम बादशाह अकबर यमुना नदी के किनारे सैर का आनंद उठा रहे थे कि उन्हें वहां एक ऊंट घूमता हुआ दिखाई दिया। ऊंट की गर्दन देख राजा ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि ऊंट की गर्दन मुड़ी हुई क्यों होती है?”

बादशाह अकबर का सवाल सुनते ही बीरबल को उन्हें इनाम की बात याद दिलाने का मौका मिल गया। बीरबल से झट से उत्तर दिया, “महाराज, दरअसल यह ऊंट किसी से किया हुआ अपना वादा भूल गया था, तब से इसकी गर्दन ऐसी ही है। बीरबल ने आगे कहा, “लोगों का यह मानना है कि जो भी व्यक्ति अपना किया हुआ वादा भूल जाता है, उसकी गर्दन इसी तरह मुड़ जाती है।”

बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरान हो गए और उन्हें बीरबल से किया हुआ अपना वादा याद आ गया। उन्होंने बीरबल से जल्दी महल चलने को कहा। महल पहुंचते ही बादशाह अकबर ने बीरबल को इनाम दिया और उससे पूछा, “मेरी गर्दन ऊंट की तरह तो नहीं हो जाएगी न?” बीरबल ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “नहीं महाराज।” यह सुनकर बादशाह और बीरबल दोनों ठहाके लगाकर हंस दिए।

इस तरह बीरबल ने बादशाह अकबर को नाराज किए बगैर उन्हें अपना किया हुआ वादा याद दिलाया और अपना इनाम लिया।

Title: ऊंट की गर्दन || birbal and akbar story hindi