कभी कभी सोचता हूँ क्या होती होगी एक शायर की मोहब्बत,
दिल जुड़ने पर प्यार भरे शेर,
दिल टूटे पर दुख भरे शेर,
उसकी याद मैं लिखे गए शेर,
और उसकी वापसी आने की उम्मीद मैं लिखे गए शेर |
कभी कभी सोचता हूँ क्या होती होगी एक शायर की मोहब्बत,
दिल जुड़ने पर प्यार भरे शेर,
दिल टूटे पर दुख भरे शेर,
उसकी याद मैं लिखे गए शेर,
और उसकी वापसी आने की उम्मीद मैं लिखे गए शेर |
हालातों से टकराकर हमने, खुद को मजबूत बनाया है..
तभी तो हर दर्द से लड़ने का, हुनर हम में आया है..
पहले डरा करते थे दर्द से हम, अब दर्द को हमने डराया है..
पहले रहता था, ताव में वो, अब जाकर घुटनों पे आया है..
अब नहीं सताता वो हमको, हमने खुदको इतना सताया है..
हम पत्थर बनकर बैठे गए, पत्थरों से कौन लड पाया है….
Kujh taa socheyaa howega tere te mere baare rabb ne nahi taa
aini wadhi duniyaa vich tere te hi dil kyu aunda mera
ਕੁੱਝ ਤਾਂ ਸੋਚਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਤੇਰੇ ਤੇ ਮੇਰੇ ਬਾਰੇ ਰੱਬ ਨੇ ਨਹੀਂ ਤਾਂ
ਐਨੀ ਵੱਡੀ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਤੇਰੇ ਤੇ ਹੀ ਦਿਲ ਕਿਓਂ ਆਉਂਦਾ ਮੇਰਾ