इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
Ishq di laggi e Jo seene vich mere
Es agni ch ho Jana rakh mein..!!
Rul Jana e tere ishq diyan galliyan vich
Tere pairan ch ho Jana khak mein..!!
ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਲੱਗੀ ਏ ਜੋ ਸੀਨੇ ਵਿੱਚ
ਇਸ ਅੱਗ ‘ਚ ਹੋ ਜਾਣਾ ਰਾਖ ਮੈਂ..!!
ਰੁਲ ਜਾਣਾ ਏ ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ਦੀਆਂ ਗਲੀਆਂ ਵਿੱਚ
ਤੇਰੇ ਪੈਰਾਂ ‘ਚ ਹੋ ਜਾਣਾ ਖ਼ਾਕ ਮੈਂ..!!