इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
Enniya thokran den lyi tera vi dhanwaad e zindagi
Challan da nhi sambhlan da hunar taan aa hi gya 🍂
ਇੰਨੀਆਂ ਠੋਕਰਾਂ ਦੇਣ ਲਈ ਤੇਰਾ ਵੀ ਧੰਨਵਾਦ ਏ ਜ਼ਿੰਦਗੀ
ਚੱਲਣ ਦਾ ਨਹੀਂ ਸੰਭਲ਼ਣ ਦਾ ਹੁਨਰ ਤਾਂ ਆ ਹੀ ਗਿਆ 🍂
Chand mein baithkar subah ka intzaar karta hu
Thoda kal sochkar aaj izhaar karta hu
Jab bhi meri nadaniyon ne galti karne ki izazat di hai
Tab mere bure waqt ne bhi meri hifazat ki hai..
चांद में बैठकर सुबह का इंतज़ार करता हूं,
थोड़ा कल सोचकर आज इजहार करता हूं…
जब भी मेरी नादानियो ने गलती करने की इजाज़त दी है,
तब मेरे बुरे वक्त ने भी हमेशा मेरी हिफाज़त की है…