इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...

peer e bhawe fakeer e
kise ne na badalni taqdeer e
e khuda shuru tu kita khatam tu kita
fir kyu dikhaunde hath di lakeer e
ਪੀਰ ਏ ਭਵੇ ਫਕੀਰ ਏ,
ਕਿਸੇ ਨੇ ਨਾ ਬਦਲਨੀ ਤਕਦੀਰ ਏ।
ਏ ਖੁਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਤੂੰ ਕੀਤਾ-ਖਤਮ ਤੂੰ ਕੀਤਾ,
ਫਿਰ ਕਿਉ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹੱਥ ਦੀ ਲਕੀਰ ਏ
..ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਔਲਖ