इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
Enjoy Every Movement of life!
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
phir kaheen se dard ke sikke milenge,
ye hathelee aaj phir khujala rahee hai..
फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे,
ये हथेली आज फिर खुजला रही है..

Is rog da dharam na yaat koi
lagge jis dil nu samjhe na jajhbaat koi
khad khad rawaan te take har shaam nu
fir bina jageyaan na langhe raat koi