इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
कड़ी धूप हो या हो शीतकाल,
हल चलाकर न होता बेहाल.
रिमझिम करता होगा सवेरा,
इसी आस में न रोकता चाल.
खेती बाड़ी में जुटाता ईमान,
महान पुरूष हैं, है वो किसान.
छोटे-छोटे से बीज बोता,
वही एक बड़ा खेत होता.
जिसकी दरकार होती उसे,
बोकर उसे वह तभी सोता.
खेतो का कण-कण हैं जिसकी जान,
महान पुरूष है, है वो किसान.
तरुण चौधरी
ਇੱਕ ਹੀਰੇ ਨੂੰ ਪਿਘਲਾਉਣ ਲਈ
ਸਾਰੇ ਕੱਚ ਦੇ ਟੁਕੜੇ… ਧੁੱਪੇ ਸੜ ਰਹੇ ਆ… ਬਸ
ਇਹਨਾਂ ਕਰਕੇ ਹੀ ਮੇਰੀ ਚਮਕ ਵੱਧ ਰਹੀ ਆ…..
ik heere nu piglaun lai
saare kach de dukdhe… dhupe sadh rahe aa.. bas
ehnaa karke hi meri chamak wadh rahi aa