इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
Har saah naal teri khair mangde rahage
duniyaa de nakshe te tera sohna pind
preet yaad kadhu meri jaan jado sheher
tere vicho asi langhde rahange
ਹਰ ਸਾਹ ਨਾਲ ਤੇਰੀ ਖੈਰ ਮੰਗਦੇ ਰਹਾਗੇ
ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਨਕਸ਼ੇ ਤੇ ਤੇਰਾ ਸੋਹਣਾ ਪਿੰਡ
ਪ੍ਰੀਤ ਯਾਦ ਕੱਢੂ ਮੇਰੀ ਜਾਨ ਜਦੋ ਸ਼ਹਿਰ
ਤੇਰੇ ਵਿੱਚੋਂ ਅਸੀ ਲੰਘਦੇ ਰਹਾਗੇ
ਭਾਈ ਰੂਪਾ
हमें रुसवा करके उन्हें, गैर बाँहों का इंतज़ार है..
हमारी वफ़ा उन्हें वफ़ा ना लगी, गैरों पर ऐतबार है..
इसे जीत कहूँ उनकी, या ये मेरे दिल की हार है..
बेवफाई सिखाई है मेरे दिल को, मेरी ना माने, अब भी उससे प्यार है..