इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
तुझे दिल ने इस कदर चाहा है कि,
अब तो सांस भी तेरे नाम से चल रही हैं,
ये नज़रे तेरे दीदार से खुल रही हैं,
तेरे हाथों की नर्मी से मेरे चेहरे पर खुशी दमक रही है,
तेरी बातों से मेरे लब खिल रहे हैं,
मेरा मुझ में कुछ बचा ही नहीं,
अब तो मेरी जिंदगी तेरी जिंदगी से चल रही है।।
mazboor ho ke nahi hunda har koi judaa
kujh lok marzi nu majboori keh dinde ne
ਮਜ਼ਬੂਰ ਹੋ ਕੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹਰ ਕੋਈ ਜੁਦਾ..
ਕੁੱਝ ਲੋਕ ਮਰਜੀ ਨੂੰ ਮਜਬੂਰੀ ਕਹਿ ਦਿੰਦੇ ਨੇ ..