इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...
Mohobbat vi dilan te ki kehar kamawe
Kise rajj ke rulawe
Kise gal naal lawe..!!
ਮੋਹੁੱਬਤ ਵੀ ਦਿਲਾਂ ਤੇ ਕੀ ਕਹਿਰ ਕਮਾਵੇ
ਕਿਸੇ ਰੱਜ ਕੇ ਰੁਲਾਵੇ
ਕਿਸੇ ਗਲ ਨਾਲ ਲਾਵੇ..!!
shayer taa nahi haa me
bas do akhar bewafai de likhda haa
khaake dhokhe ishq de raah te
me bas jina sikda haa
ਸ਼ਾਇਰ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਮੈਂ
ਬੱਸ ਦੋ ਅਖਰ ਬੇਵਫ਼ਾਈ ਦੇ ਲਿਖਦਾ ਹਾਂ
ਖਾਕੇ ਧੋਖੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹ ਤੇ
ਮੈਂ ਬੱਸ ਜਿਨਾ ਸਿਕਦਾ ਹਾਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ