The desert knows me well, the night and the mounted men, the battle and the sword, the paper and the pen.
The desert knows me well, the night and the mounted men, the battle and the sword, the paper and the pen.
Shauk ta mere v sire de ne..
par jo mapeyaa da dil dukhawe
oh shauk rakhdi ni me
ਸ਼ੋਕ ਤਾ ਮੇਰੇ ਵੀ ਸਿਰੇ ਦੇ ਨੇ…
ਪਰ ਜੋ ਮਾਪਿਆਂ ਦਾ ਦਿਲ ਦੁੱਖਾਵੇ
ਉਹ ਸ਼ੋਕ Rakhdi ਨੀ ਮੈ..
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी