Cool jeha subaah teri mutiyaar da
fool jeha na samjhi
lakhan vichon ik haa
fazool jehi na samjhi
Cool ਜਿਹਾ ਸੁਭਾਅ ਤੇਰੀ ਮੁਟਿਆਰ ਦਾ #
Fool ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ #
ਲਖਾਂ ਵਿਚੋ ਇਕ ਹਾ #
ਫਜੂਲ ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ...
Cool jeha subaah teri mutiyaar da
fool jeha na samjhi
lakhan vichon ik haa
fazool jehi na samjhi
Cool ਜਿਹਾ ਸੁਭਾਅ ਤੇਰੀ ਮੁਟਿਆਰ ਦਾ #
Fool ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ #
ਲਖਾਂ ਵਿਚੋ ਇਕ ਹਾ #
ਫਜੂਲ ਜਿਹੀ ਨਾ ਸਮਝੀ...
Tadap jehi kaale ch uthdi || sacha pyar || shayari
Tadap jehi kalje ch uthdi e mere
Kuj lgda seene cho aar paar ho gaya e
Nain jagde hii rehnde ne raatan nu hun
Kaada chan jehe chehre da didar ho gaya e
Kuj khayalan ch badlaw v on lgga e
Dil v kehne to jiwe Bahr ho gaya e
Khud di halat di vi khabar nahi rehndi menu sajjna
Suneya e loka to k menu pyar ho gaya e
ਤੜਪ ਜੇਹੀ ਕਾਲਜੇ ਚ ਉੱਠਦੀ ਏ ਮੇਰੇ
ਕੁਝ ਸੀਨੇ ਚੋਂ ਜਿਵੇਂ ਆਰ ਪਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਨੈਣ ਜਾਗਦੇ ਹੀ ਰਹਿੰਦੇ ਨੇ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਹੁਣ
ਕਾਦਾ ਚੰਨ ਜਿਹੇ ਚਿਹਰੇ ਦਾ ਦੀਦਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਕੁਝ ਖਿਆਲਾਂ ‘ਚ ਬਦਲਾਵ ਵੀ ਆਉਣ ਲੱਗਾ ਏ
ਦਿਲ ਵੀ ਕਹਿਣੇ ਤੋੰ ਜਿਵੇਂ ਬਾਹਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
ਖੁਦ ਦੀ ਹਾਲਤ ਦੀ ਵੀ ਖ਼ਬਰ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦੀ ਮੈਨੂੰ ਸੱਜਣਾ
ਸੁਣਿਆ ਏ ਲੋਕਾਂ ਤੋਂ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਹੋ ਗਿਆ ਏ..!!
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी
तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी
हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण
साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी।
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी
कलम उठाई है
कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने
समेट लाई है
माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें
लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने?
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में
पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में
चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में
बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।
बीत गए कई बारिश के मौसम
क्या धुले नहीं, जमे धूल मन के?
है अर्जी मेरी चले आओ तुम
मेरे भीतर के तम को रोशनी दिखाओ तुम..
याद है ना तुम्हें..
पहली दफा,
जब कलम मेरी बोली थी
तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां
मैंने पिरोई थी।