socheyaa si k na keeta jaawe ishq
asi fir v ishq ch pe gaye
had ton vadh kita ishq
asi fir v ikalle reh gaye
ਸੋਚਿਆ ਸੀ ਕਿ ਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਇਸ਼ਕ
ਅਸੀਂ ਫਿਰ ਵੀ ਇਸ਼ਕ ਚ ਪੈ ਗਏੇ
ਹਦ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕੀਤਾ ਇਸ਼ਕ
ਅਸੀਂ ਫਿਰ ਵੀ ਕਲੇ ਰੇਹ ਗਏ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
socheyaa si k na keeta jaawe ishq
asi fir v ishq ch pe gaye
had ton vadh kita ishq
asi fir v ikalle reh gaye
ਸੋਚਿਆ ਸੀ ਕਿ ਨਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਇਸ਼ਕ
ਅਸੀਂ ਫਿਰ ਵੀ ਇਸ਼ਕ ਚ ਪੈ ਗਏੇ
ਹਦ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕੀਤਾ ਇਸ਼ਕ
ਅਸੀਂ ਫਿਰ ਵੀ ਕਲੇ ਰੇਹ ਗਏ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
चलेगी जब तेरी यादों की पुरवाई तो क्या होगा
पुरानी चोट कोई फिर उभर आई तो क्या होगा,
मुहब्बत ख़ुद ही बन बैठी तमाशाई तो क्या होगा
न हम होंगे, न तुम होंगे, न तनहाई तो क्या होगा,
मुहब्बत की झुलसती धूप और काँटों भरे रस्ते
तुम्हारी याद नंगे पाँव गर आई तो क्या होगा,
ऐ मेरे दिल तू उनके पास जाता है तो जा, लेकिन
तबीअत उनसे मिलकर और घबराई तो क्या होगा,
लबों पर हमने नक़ली मुस्कराहट ओढ़ तो ली है
किसी ने पढ़ ली चेह्रे से जो सच्चाई तो क्या होगा,
सुना तो दूँ मुहब्बत की कहानी मैं तुम्हें लेकिन
तुम्हारी आँख भी ऐ दोस्त भर आई तो क्या होगा,
ख़ुदा के वास्ते अब तो परखना छोड़ दे मुझको
अगर कर दी किसी ने तेरी भरपाई तो क्या होगा..
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥