jado khud naal gal hon lag jawe
taa samjo gal ban gai
ਜਦੋ ਖੁਦ ਨਾਲ ਗੱਲ ਹੋਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇ
ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਗੱਲ ਬਣ ਗੲੀ
jado khud naal gal hon lag jawe
taa samjo gal ban gai
ਜਦੋ ਖੁਦ ਨਾਲ ਗੱਲ ਹੋਣ ਲੱਗ ਜਾਵੇ
ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਗੱਲ ਬਣ ਗੲੀ
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा