Skip to content

Gallan karn nu taa || sach punjabi shayari in 2 lines

Gallan karn nu taa duniyaa sher hundi e
beete aapne naal takleef taa fer hundi e

ਗੱਲਾ ਕਰਨ ਨੂੰ ਤਾ ਦੁਨੀਆ ਸ਼ੇਰ ਹੁੰਦੀ ਏ..!!
ਬੀਤੇ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਤਕਲੀਫ ਤਾਂ ਫੇਰ ਹੁੰਦੀ ਏ.😊

Title: Gallan karn nu taa || sach punjabi shayari in 2 lines

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Aagg ko bujha deta hai krodh || 2 lines shayari hindi

आग को बुझा देता है क्रोध ।

आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।

……………………………………………

अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।

अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।

………………………………………….

जबाब हर बात पे मत दो।

सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।

…………………………………….

जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।

जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।

………………………………………

रिश्ते आसमान की रूप।

आज बारिश, कल धूप।

……………………………………..

बात लहर की तरह।

जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।

………………………………………..

मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।

घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।

……………………………………..

जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।

समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।

Title: Aagg ko bujha deta hai krodh || 2 lines shayari hindi


Bharosa paala hai || hindi poetry

मैंने मेरे मन में

एक भरोसा पाला

उसे कभी क़ैद नहीं किया

वह जब-जब उड़ा फिर लौट आया

चिड़िया जैसे नन्हे पंख उगे

धरती के गुरुत्व के विरुद्ध पहली उड़ान

पहला लक्षण था आज़ादी की चाहना का

भरोसे के भीतर एक और भरोसा जन्मा

और ये सिलसिला चलता रहा

अब इनकी संख्या इतनी है

कि निराश होने के लिए

मुझे अपने हर भरोसे के पंख मरोड़कर

उन्हें अपाहिज बनाना होगा!

करना होगा क़ैद

जो मैं कर नहीं पाऊँगी

हैरानी! मैं ऐसा सोच भी पाई

अपनी इस सोच पर बीती रात घंटों सोचा

ख़ुद पर लानतें फेंकीं

कोसा ख़ुद को

मन ग्लानि से भर उठा

आँखों के कोने भीगते गए

और फिर इकठ्ठा किया अपना सारा प्यार

उनके पंखों को सहलाया

हर एक भरोसे को पुचकारा

उनके सतरंगे पंखों को

आज़ादी के एहसास से भरते देखा

सुबह तक वे एक लंबी उड़ान पर निकल चुके थे

उनकी अनुपस्थिति में

मैं निराश!

पर जान पा रही थी कि शाम तक वे लौट आएँगे

यह वह भरोसा है

जिसके पंख अभी उगने बाक़ी हैं

जो अभी ही है जन्मा!

Title: Bharosa paala hai || hindi poetry