Hamara libaas dekhkr hame gareeb n samjh
Hamara gam bhi tumhari jayedad se jyada hai..
हमारा लिबास देखकर हमें गरीब न समझ
हमारा गम भी तुम्हारी जायदाद से ज्यादा है..
Hamara libaas dekhkr hame gareeb n samjh
Hamara gam bhi tumhari jayedad se jyada hai..
हमारा लिबास देखकर हमें गरीब न समझ
हमारा गम भी तुम्हारी जायदाद से ज्यादा है..
मैं ना जानू दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
यह जिंदगी कैसे जंग बन गई है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
यह गांव की गलियां कैसे सुनी हो गई है।
मैंने जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
वो खेल का मैदान अब सुना लगता है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
कैसे फूल जैसी जिंदगी पत्थर बन गई है।
खुद को मनाने की कोशिश करता हूं बहुत,
लेकिन क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं।
मैं ना जानू दोस्त तेरी दूर हो जाने के बाद,
मेरे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
बाजारों की रौनक भी फीकी लगती है।
तू कब आएगा मेरे भाई मेरे दोस्त,
तेरे को हर दिन गले लगाने का मन करता है।