Gam le k me seene vich
saari saari raat na soyea
tu tareyaa nu puchh ke vekh
tere pichhon me kina kina royea
ਗਮ ਲੈ ਕੇ ਮੈਂ ਸੀਨੇ ਵਿੱਚ
ਸਾਰੀ ਸਾਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸੋਇਆ
ਤੂੰ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਪੁੱਛ ਕੇ ਵੇਖ
ਤੇਰੇ ਪਿੱਛੋਂ ਮੈਂ ਕਿੰਨਾ ਕਿੰਨਾ ਰੋਇਆ
[feed_adsense]
Gam le k me seene vich
saari saari raat na soyea
tu tareyaa nu puchh ke vekh
tere pichhon me kina kina royea
ਗਮ ਲੈ ਕੇ ਮੈਂ ਸੀਨੇ ਵਿੱਚ
ਸਾਰੀ ਸਾਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸੋਇਆ
ਤੂੰ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਪੁੱਛ ਕੇ ਵੇਖ
ਤੇਰੇ ਪਿੱਛੋਂ ਮੈਂ ਕਿੰਨਾ ਕਿੰਨਾ ਰੋਇਆ
[feed_adsense]
शाम बीती और रात हुई, गमों की फिर बरसात हुई..
तुझे भुलने को फिर से जाम पिया, गलती फिर मेरे हाथ हुई..
फिर से बहक गए लफ्ज मेरे, लफ्जों पे फिर से दात हुई..
दिलजले थे वहां कई मुझ जैसे, उनकी भी इश्क में मात हुई..
वही एक तरह का हर किस्सा, इश्क की भी भला कोई जात हुई..
हर कहानी ख़ुशी से शुरू हुई, ख़तम आंसुओं के साथ हुई..
महफिल को छोड़ चले घर की ओर, तन्हाई से फिर मुलाकात हुई..
तेरी याद बढ़ गई हर जाम के साथ, भला ये भी कोई बात हुई..
काश बनाने वाले ने दिल कांच के बनाये होते,
तोड़ने वाले के हाथ में ज़ख्म तो आये होते…
kaash banaane vaale ne dil kaanch ke banaaye hote,
todane vaale ke haath mein zakhm to aaye hote…