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Gam panne pe || hindi shayari

Shayari mein apna dard talash kroge to bta nhi payegi…
Usmein gam auro ka likha hai, tumhara jta nhi payegi…
Apne gam aur khushi ko panne pe utarna sikh lo..
Ye mera tazurba kehta hai, tumhe koi takleef staa nhi payegi…

शायरी में अपना दर्द तलाश करोगे तो बता नहीं पायेगी..
उसमे गम ओरों का लिखा है, तुम्हारा जता नहीं पायेगी..
अपने गम और खुशी को पन्ने पे उतारना सीख लो..
ये मेरा तजुर्बा कहता है, तुम्हे कोई तकलीफ सता नहीं पायेगी.

Title: Gam panne pe || hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


अकेले चले जाते हो || Hindi Love poem – Shayari

अकेले चले जाते हो
बताते भी नहीं हो

बातें दिल में रखते हो
सुनाते भी नहीं हो

अपने राज छुपाए रखते हो
हमारे जान लेते हो

भीड़ में होकर भी
लापता से रहते हो

जो सवाल पूछो तो
नजरे चुराते हो

स्टेटस भी देखते हो
और देखकार मुस्कुरा भी देते

जाने किस रोज को रुके हो
फोन लगाते भी नहीं हो

हमारा दर्द भी समझते हो
फिर भी नसमझ सा बनते हो

कभी बहुत अपनापन जताते हो
और कभी पराए हो जाते हो

बाला की ख़ूबसूरत हो
पर इतराते नहीं हो

वैसे तो हर लिबास में हसीन हो
पर पीली कुर्ती में बिजलियाँ गिराते हो

मशहूर होकर भी गुमनाम सा रहते हो
ताजगी सुबह की हैं पर मस्तानी शाम सा रहते हो

बांधते हो और फिर खोल देते हो
इन जुल्फों से बड़ा खेलते हो

चेहरे की किताब के अक्षरों में उलझाते हो
अब बोल भी दो दिल की बात क्यों हमारे जख्मों को सहलाते हो

मैं तो सामने से नहीं बोल पाऊंगा
डरता हूं तुम्हारी ना हुई तो नहीं झेल पाऊंगा

अब तुम भी तो कभी कुछ इशारों को समझो
किसी चंचल नांव की तरह लहरें से उलझो

अब जब कभी तुमसे अगली मुलाकात हो
इधर-उधर की नहीं सीधे मुद्दे की बात हो

फिर जो भी फैसला आए हमें मंजुर हो
इकरार हो या ना हो पर अब इजहार तो जरूर हो।

इजहार तो जरूर हो।
इजहार तो जरूर हो।

Title: अकेले चले जाते हो || Hindi Love poem – Shayari


hindi Shayari || beautiful shayari gazal

ग़ज़ल !

तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।

दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।

सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।

तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।

अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।

मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।

हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।

तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।