Bina kiteyan gunahan di mili jiwe saza
Udaas e man par pta nhio vajah..!!
ਬਿਨਾਂ ਕੀਤਿਆਂ ਗੁਨਾਹਾਂ ਦੀ ਮਿਲੀ ਜਿਵੇਂ ਸਜ਼ਾ
ਉਦਾਸ ਏ ਮਨ ਪਰ ਪਤਾ ਨਹੀਂਓ ਵਜ੍ਹਾ..!!
Bina kiteyan gunahan di mili jiwe saza
Udaas e man par pta nhio vajah..!!
ਬਿਨਾਂ ਕੀਤਿਆਂ ਗੁਨਾਹਾਂ ਦੀ ਮਿਲੀ ਜਿਵੇਂ ਸਜ਼ਾ
ਉਦਾਸ ਏ ਮਨ ਪਰ ਪਤਾ ਨਹੀਂਓ ਵਜ੍ਹਾ..!!
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…
इंतजार है,
तेरे प्यार का,
ये करार है,
ऐतबार का,
मिल के तुझसे,
ये सवाल है,
तुझे भी क्या मेरा खयाल है……❤️