हाल न पूछो हमारा..
बस मेरे लिखे खत को महसूस करो
दर्द भी तड़पती है कागज़ पर
मुझे कोई इस आग से महफूज करो
हाल न पूछो हमारा..
बस मेरे लिखे खत को महसूस करो
दर्द भी तड़पती है कागज़ पर
मुझे कोई इस आग से महफूज करो
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला
तरुण चौधरी
qayaamat toot padatee hai zara se honth hilane par,
jaane kya hasr hoga jab vo khulakar muskuraayenge…
क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर,
जाने क्या हस्र होगा जब वो खुलकर मुस्कुरायेंगे…💓