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Hamare mutabaadil || Urdu Ghazal or Shayari

HAMARE MUTABAADIL KI TALAASH HAIN UNHE

HUM SHAKAL TO MIL JAAYE UNHE LEKIN HUM SEERAT NA HO

ہمارے متبادل کی تلاش ہیں انھیں

ہم شکل تو لم جائیں انھیں ہم سیرت نہ ہو

Title: Hamare mutabaadil || Urdu Ghazal or Shayari

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Rahne do

Kyu karte ho duniyaa daari ki baate
Kyu karte ho duniyaa daari ki baate




धरती सारी

दरवाज़ा किसी के जीवन में

ख़ुद को समझ लें

उस ग़ुरूर से बचाना ईश्वर

कि बंद करने को

कुछ रहे पास

दीवार ही सही

कमर टिकाई हो जिस पर

कभी किसी कमज़ोर पल

उस पर थूक सकने की

जहालत से भी बचाना

पर वह साहस ज़रूर देना

जो मुँह से बाहर निकलते दिल को पकड़ सके

सँभाल सके और कह सके

कि जो पाया उसे लौटाने से ज़्यादा ज़रूरी है

उस भूमिका को सँभालना जो हम निभाते हैं

अपने या किसी और के जीवन में

माफ़ कर सकें उनसे ज़्यादा खुद को

याद रख सकें बस इतना

कि विश्व के सबसे अलोकप्रिय लोगों ने बख़्शी जान हमें

उन्हें सबने नज़रंदाज़ किया

उनके पैरों में सारे आँसू वार दें

उनकी हथेली में बिखेर सकें सारी हँसी

जब कह देना ही सब कुछ हो

चुप रह सकें उस वक़्त

कड़वी बात को यूँ ज़ब्त कर लें

नाख़ूनों में भर लें

खुरचकर धरती सारी।

Title: धरती सारी