अपने नए आशिक से हमें भी मिला के जाना। उनका खूबसूरत चेहरा हमे भी दिखा के जाना।। हम भी बैठे बैठे एक दो खेल खेल लेंगे ये दिलों से खेलना हमे भी सिखा के जाना।।
अपने नए आशिक से हमें भी मिला के जाना। उनका खूबसूरत चेहरा हमे भी दिखा के जाना।। हम भी बैठे बैठे एक दो खेल खेल लेंगे ये दिलों से खेलना हमे भी सिखा के जाना।।
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Maine kab kaha mujhe gulaab dijiye
ya fir mohabbat se nawaz dijiye
Aaj bahut udaas hai dil
Gair ban ke hi sahi pr ek bar awaaz dijiye🍁
मैने कब कहा मुझे गुलाब दीजिये
या फिर मोहोब्बत से नवाज़ दीजिये
आज बहुत उदास है दिल
गैर बन के ही सही पर एक बार आवाज़ दीजिये🍁