डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
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डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
vo bhee jinda hai,
main bhee jinda hoon,
qatl sirph ishq ka hua hai.….
वो भी जिन्दा है, मैं भी जिन्दा हूँ,
क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है.….
Vo dekh kar bhi nazarandaaz karte
Par koi na gila humein
Ishq ho ya nafrat
Sab thoda hi mila humein💔
वो देख कर भी नजरंदाज करते
पर कोई न गिला हमे
ईश्क हो या नफरत
सब थोड़ा ही मिला हमे💔