हमें रुसवा करके उन्हें, गैर बाँहों का इंतज़ार है..
हमारी वफ़ा उन्हें वफ़ा ना लगी, गैरों पर ऐतबार है..
इसे जीत कहूँ उनकी, या ये मेरे दिल की हार है..
बेवफाई सिखाई है मेरे दिल को, मेरी ना माने, अब भी उससे प्यार है..
हमें रुसवा करके उन्हें, गैर बाँहों का इंतज़ार है..
हमारी वफ़ा उन्हें वफ़ा ना लगी, गैरों पर ऐतबार है..
इसे जीत कहूँ उनकी, या ये मेरे दिल की हार है..
बेवफाई सिखाई है मेरे दिल को, मेरी ना माने, अब भी उससे प्यार है..
इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
shifaarshaa v fizul meri
rab kehdha sunda aa
band kar khaab vekhna mukamal ishq de
gaaba jehdha tu pyaara de bunda e
ਸਿਫ਼ਾਰਿਸ਼ਾਂ ਵੀ ਫਿਜ਼ੂਲ ਮੇਰੀ
ਰੱਬ ਕੇਹੜਾ ਸੁਣਦਾ ਐਂ
ਬੰਦ ਕਰ ਖ਼ੁਆਬ ਵੇਖਣਾ ਮੁਕਮੰਲ ਇਸ਼ਕ ਦੇ
ਗਾਬਾ ਜਿਹੜੇ ਤੂੰ ਪਿਆਰਾ ਦੇ ਬੁਣਦਾ ਐਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷