Hun eh dard saheyaa nahi janda
maithon eh dil
hun hanjuaan naal dhoyea nai janda
ਹੁਣ ਇਹ ਦਰਦ ਸਹਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ
ਮੈਥੋਂ ਇਹ ਦਿਲ ਹੁਣ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ ਧੋਇਆ ਨਈ ਜਾਂਦਾ
Hun eh dard saheyaa nahi janda
maithon eh dil
hun hanjuaan naal dhoyea nai janda
ਹੁਣ ਇਹ ਦਰਦ ਸਹਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ
ਮੈਥੋਂ ਇਹ ਦਿਲ ਹੁਣ ਹੰਝੂਆਂ ਨਾਲ ਧੋਇਆ ਨਈ ਜਾਂਦਾ
Tumhe lagta tha ki me jaanta kush bhi nahi
mujhe pata tha ki raasta badal rahe ho tum
तुम्हें लगता था की मैं जानता कुछ भी नहीं,
मुझे पता था की रास्ता बदल रहे हो तुम।
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥