Har cheez apne aap vich sundar hai
bas usnu pehchaann vich der hai
ਹਰ ਚੀਜ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿੱਚ ਸੁੰਦਰ ਹੈ,
ਬਸ ਉਸ ਨੂੰ ਪਛਾਨਣ ਵਿੱਚ ਦੇਰ ਹੈ।।
Har cheez apne aap vich sundar hai
bas usnu pehchaann vich der hai
ਹਰ ਚੀਜ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿੱਚ ਸੁੰਦਰ ਹੈ,
ਬਸ ਉਸ ਨੂੰ ਪਛਾਨਣ ਵਿੱਚ ਦੇਰ ਹੈ।।
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Tenu dekhde hi👉 bhul jawn duniya de nazare
Ki kara mein dass ehna akhiyan da🤦♀️..!!
Jithe dekha 👀dikhein menu tu hi passe chare😍
Ki kara mein dass🤷 ehna akhiyan da😇..!!
ਤੈਨੂੰ ਦੇਖਦੇ ਹੀ👉 ਭੁੱਲ ਜਾਵਣ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਨਜ਼ਾਰੇ
ਕੀ ਕਰਾਂ ਮੈਂ ਦੱਸ ਇਹਨਾਂ ਅੱਖੀਆਂ ਦਾ🤦♀️..!!
ਜਿੱਥੇ ਦੇਖਾਂ 👀ਦਿਖੇੰ ਮੈਨੂੰ ਤੂੰ ਹੀ ਪਾਸੇ ਚਾਰੇ😍
ਕੀ ਕਰਾਂ ਮੈਂ ਦੱਸ🤷 ਇਹਨਾਂ ਅੱਖੀਆਂ ਦਾ😇..!!