har ik nu gulaab nahi naseeb hunda
kaiyaa hise kandde v aunde aa
ਹਰ ਇਕ ਨੂੰ ਗੁਲਾਬ 🌹 ਨਹੀਂ ਨਸੀਬ ਹੁੰਦਾ,
ਕਈਆਂ ਹਿੱਸੇ ਕੰਡੇ ਵੀ ਆਉਂਦੇ ਆ |😊
har ik nu gulaab nahi naseeb hunda
kaiyaa hise kandde v aunde aa
ਹਰ ਇਕ ਨੂੰ ਗੁਲਾਬ 🌹 ਨਹੀਂ ਨਸੀਬ ਹੁੰਦਾ,
ਕਈਆਂ ਹਿੱਸੇ ਕੰਡੇ ਵੀ ਆਉਂਦੇ ਆ |😊
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं
तेरे बाद में इश्क नही करता
तू आखरी थी अब मैं किसी पे नही मरता
बोहोत सुना जमाने को मगर
अब मैं लोगो की परवाह नही करता