Har vaar alfaaz hi kafi nahi hunde
kise nu samjaun lai
kade kade chapedaan v chhadniyaan paindiaan ne
ਹਰ ਵਾਰ ਅਲਫ਼ਾਜ਼ ਹੀ ਕਾਫੀ ਨਹੀ ਹੁੰਦੇ,
ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਲਈ..
ਕਦੇ ਕਦੇ ਚਪੇੜਾਂ ਵੀ ਛੱਡਣੀਆਂ ਪੈਂਦੀਆਂ ਨੇ।
Har vaar alfaaz hi kafi nahi hunde
kise nu samjaun lai
kade kade chapedaan v chhadniyaan paindiaan ne
ਹਰ ਵਾਰ ਅਲਫ਼ਾਜ਼ ਹੀ ਕਾਫੀ ਨਹੀ ਹੁੰਦੇ,
ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਲਈ..
ਕਦੇ ਕਦੇ ਚਪੇੜਾਂ ਵੀ ਛੱਡਣੀਆਂ ਪੈਂਦੀਆਂ ਨੇ।
यह अधूरा इश्क कब पूरा होगा
होगा भी जा अधूरा रहेगा
ना तुम आए ना पैगाम आया
तुम्हरे पैगाम का कब तक
इंतजार रहेगा
कौन सी जगह है वोह
जहा पर वोह सो गया
ना जाने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया
हम गलियों मै देख आए
ना गलियों मै वोह मिला
हम बात उसकी कर रहे
हमें छोड़ कर जो गया
नाजने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया
हम पहचान बताते हैं उसकी
सफेद रंग और काले घने बाल है।
कहां रहते हैं वोह कोनसे गांव और शहर में
एकेले थे जा कोई नाल है।
काले रंग की पेंट और कमीज़ पहनते है।
एक हाथ मै डायरी और एक हाथ
मे कलम पकड़ कर रखते हैं।
उनकी चाहत सबसे ज्यादा डायरी से
और वोह डायरी को
सिने से जकड़ कर रखते है।
उनका नाम है हर्ष
जो शायरी करते थे
अब तो नाम उनका गुमनाम सा हो गया
ना जाने कौन सी वोह गालियां है
जिस शहर की गलियों में खो गया।