हर जमाने में मुझे सिर्फ वही एक जमाना याद आया..
ये जमाना भी इस जमाने में उस जमाने के बाद आया..
बचपन के उस जमाने में, हम जो जमाना जिया करते थे..
ये जमाना उस जमाने जैसा नहीं, उस जमाने में जमाने का जो स्वाद आया..
हर जमाने में मुझे सिर्फ वही एक जमाना याद आया..
ये जमाना भी इस जमाने में उस जमाने के बाद आया..
बचपन के उस जमाने में, हम जो जमाना जिया करते थे..
ये जमाना उस जमाने जैसा नहीं, उस जमाने में जमाने का जो स्वाद आया..
एक बार अकबर और बीरबल बागीचे में बैठे थे। अचानक अकबर ने बीरबल से पूछा कि क्या तुम किसी ऐसे इन्सान को खोज सकते हो जिसमें अलग-अलग बोली बोलने की खूबी हों?
बीरबल ने कहा, क्यों नहीं, मै एक आदमी जानता हूँ जो तोते की बोली बोलता है, शेर की बोली बोलता है, और गधे की बोली भी बोलता है। अकबर इस बात को सुन कर हैरत में पड़ गए। उन्होने बीरबल को कहा किअगले दिन उस आदमी को पेश किया जाये।
बीरबल उस आदमी को अगले दिन सुबह दरबार में ले गए। और उसे एक छोटी बोतल शराब पीला दी। अब हल्के नशे की हालत में शराबी अकबर बादशाह के आगे खड़ा था। वह जानता था की दारू पी कर आया जान कर बादशाह सज़ा देगा। इस लिए वह गिड़गिड़ाने लगा। और बादशाह की खुशामत करने लगा। तब बीरबल बोले की हुज़ूर, यह जो सज़ा के डर से बोल रहा है वह तोते की भाषा है।
उसके बाद बीरबल ने वहीं, उस आदमी को एक और शराब की बोतल पिला दी। अब वह आदमी पूरी तरह नशे में था। वह अकबर बादशाह के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया। उसने कहा कि आप नगर के बादशाह हैं तो क्या हुआ। में भी अपने घर का बादशाह हूँ। मै यहाँ किसी से नहीं डरता हूँ।
बीरबल बोले कि हुज़ूर, अब शराब के नशे में निडर होकर यह जो बोल रहा है यह शेर की भाषा है।
अब फिर से बीरबल ने उस आदमी का मुह पकड़ कर एक और बोतल उसके गले से उतार दी। इस बार वह आदमी लड़खड़ाते गिरते पड़ते हुए ज़मीन पर लेट गया और हाथ पाँव हवा में भांजते हुए, मुंह से उल-जूलूल आवाज़ें निकालने लगा। अब बीरबल बोले कि हुज़ूर अब यह जो बोल रहा है वह गधे की भाषा है।
अकबर एक बार फिर बीरबल की हाज़िर जवाबी से प्रसन्न हुए, और यह मनोरंजक उदाहरण पेश करने के लिए उन्होने बीरबल को इनाम दिया।
Muddtan to intzar c us khaas da
Kinj kara byan mohobbat de libas da
Jad vekheya taa kho gyi vich socha de
Enni der to kithe c puchan nu mein locha ve
Muddta to intzaar c us khaas da
Mil gye jwab kayi ohnu takkdeya
Mohobbat de vi jad gye ehsaas ne
Khushi jhalke akhiyan de pass jehe
Muddta to intzaar c us khaas da❤️
ਮੁੱਦਤਾਂ ਤੋਂ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਸੀ ਉਸ ਖ਼ਾਸ ਦਾ
ਕਿੰਝ ਕਰਾਂ ਬਿਆਨ ਮੁਹੱਬਤ ਦੇ ਲਿਬਾਸ ਦਾ
ਜਦ ਵੇਖਿਆ ਤਾਂ ਖੋ ਗਈ ਵਿਚ ਸੋਚਾਂ ਦੇ
ਇੰਨੀ ਦੇਰ ਤੋਂ ਸੀ ਕਿੱਥੇ ਪੁੱਛਣ ਨੂੰ ਮੈਂ ਲੋਚਾਂ ਵੇ
ਮੁੱਦਤਾਂ ਤੋਂ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਸੀ ਉਸ ਖ਼ਾਸ ਦਾ
ਮਿਲ ਗਏ ਜਵਾਬ ਕਈ ਉਹਨੂੰ ਤੱਕਦਿਆਂ
ਮੁਹੱਬਤ ਦੇ ਵੀ ਜੁੜ ਗਏ ਅਹਿਸਾਸ ਨੇ
ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਝਲਕੇ ਅੱਖੀਆਂ ਦੇ ਪਾਸ ਜਿਹੇ
ਮੁੱਦਤਾਂ ਤੋਂ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਸੀ ਉਸ ਖ਼ਾਸ ਦਾ❤️