हर जमाने में मुझे सिर्फ वही एक जमाना याद आया..
ये जमाना भी इस जमाने में उस जमाने के बाद आया..
बचपन के उस जमाने में, हम जो जमाना जिया करते थे..
ये जमाना उस जमाने जैसा नहीं, उस जमाने में जमाने का जो स्वाद आया..
हर जमाने में मुझे सिर्फ वही एक जमाना याद आया..
ये जमाना भी इस जमाने में उस जमाने के बाद आया..
बचपन के उस जमाने में, हम जो जमाना जिया करते थे..
ये जमाना उस जमाने जैसा नहीं, उस जमाने में जमाने का जो स्वाद आया..
Kya galat fehmi mein reh jane ka sadma kuch nahi,
Vo mujhe samjha to sakta tha ke esa kuch nahi
Ishq se bach kar bhi banda kuch nahi hota magar
Ye bhi sach hai ishq mein bande ka bachta kuch nahi…..🖤🥀
क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं,
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर,
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं…. 🖤🥀
Humein dekhkar andekha kar diya usne
Band ankhon se pehchanane ka kabhi dawa kiya tha jisne💔
हमे देखकर अनदेखा कर दिया उसने
बंद आंखों से पहचानने का कभी दावा किया था जिसने💔