Enjoy Every Movement of life!
मनाता हूं तो मान जाती है, फितरत तो आज भी वैसी है..
जहां जाकर भी वो मुझे ना भूली, ना जाने वो दुनिया कैसी है..
ना कर सका अलग उसे खुदा भी मुझसे, मेरे प्यार की ताकत ऐसी है..
उसके बाद ना मिला मुझे कोई भी ऐसा, जिसे कह सकूँ के उसके जैसी है..
देखा है दुनिया का दस्तूर उसने,
वो किसी की भी सुनता नहीं है...
लगा देता है अदालत चलती राहों में,
उसके दुश्मन भी चुनता वहीं है...
सही है ?
क्या दुनिया से नज़रें मिला कर चलना,
जीना है आज तो रास्ता बस यही है...
छोड़ आया था दोस्तों का काफिला पीछे, मुड़ कर देखा तो सारे दुश्मन वहीं है...
