
agar fir se wo chandani raat aa jaye
kya batau tumko
ki kya halaat hai mere
arey kya batau tumko ki kya halaat hai mere
bas band kamre me ro leta hun jab tumhari yaad aa jaye

Sochti hogi tum bhi mujhkon
bas maanti nahi hogi
Tumhain pyaar se pukarnewali
pehli awaaz joh meri thi…🍂
सोचती होगी तुम भी मुझको
बस मानती नहीं होगी
तुम्हें प्यार से पुकारनेवाली
पहली आवाज़ जो मेरी थी…🍂
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।