मैं खिल नहीं सका कि मुझे नम नहीं मिला,
साक़ी मिरे मिज़ाज का मौसम नहीं मिला।🤎
Enjoy Every Movement of life!
मैं खिल नहीं सका कि मुझे नम नहीं मिला,
साक़ी मिरे मिज़ाज का मौसम नहीं मिला।🤎
ज़िन्दगी के सफ़र में
मुसाफिर चलता गया
जैसा रब ने चाहा
वैसा सफर कटता गया
मुसाफिर आगे बढ़ते रहे
और मंज़िल का रास्ता घटता गया💯
Auron ko dekhte the vo khuleaam bich bazar mein
Na Jane humein chupke se dekhna unhe kyu aschaa lgta tha..!!
औरों को देखते थे वो खुलेआम बीच बाज़ार में
न जाने हमें चुपके से देखना उन्हें क्यों अच्छा लगता था..!!