
tarah mehsoos kar rahi haa jihde
ch honslaa taa bathera aa uchhi ton uchhi
udaan bharan da par ohde
parh katte hoye aa

Karlo ibadat bhi is waqt se
Ke laut aaye bachpan ek baar fir…
Jab rukte nahi the pair khwabon ke piche se,
Daurhti rahe ye dhadkan ek baar fir…💕
करलो इबादत भी इस वक्त से,
के लौट आए बचपन एक बार फिर…
जब रुकते नहीं थे पैर ख्वाबों के पीछे से,
दौड़ती रहे ये धड़कन एक बार फिर…💕
बंदिशों से अब कैसे खुदकी करूं हिफाज़त मैं,
सवेरे से है मोहब्बत पर, अंधेरों में रहने कि आदत है…
आफ़त है कि चिराग़ का इल्म कैसे होगा,
पता नहीं जब सवेरा होगा तो क्या होगा…
क्या होगा जो खुदसे कर लूं बगावत मै,
जीत लूं खुदको अगर हार जाऊं तो आफ़त है…
हारने का शोंक नहीं लड़ना अब रास नहीं आता,
सब कहते है मुझे तू हरकतों से बाज़ नहीं आता…
देखो, हरकतों में भी मेरी तहज़ीब और शराफत है,
जीत लेंगे दुनिया भी अगर रब की इजाज़त है… 🙃