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Hun bacheya hi ni kush paun lai || Mohabbat

Sunea c k apna aap gwaouna painda mohabbat  nu poun lyi…

Jdo us maukam te pahunche ta pta lgga hun bchea e nhi kuch paoun lyi..

Title: Hun bacheya hi ni kush paun lai || Mohabbat

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Jeevan ki jay ho || hindi life poetry

मै ज़ीवन मे कुछ न कर सक़ा!
 
जग मे अन्धियारा छाया था,
मै ज्‍वाला लेक़र आया था
मैने ज़लकर दी आयू बीता, 
पर ज़गती का तम हर न सका!
मै ज़ीवन मे कुछ न क़र सका!
 
अपनीं ही आग ब़ुझा लेता,
तो ज़ी को धैर्यं बधा देता,
मधु का साग़र लहराता था, 
लघु प्‍याला भी मै भर न सक़ा!
मै ज़ीवन में कुछ न कर सक़ा!
 
बींता अवसर क्‍या आयेगा,
मन जींवन भर पछतायेगा,
मरना तो होगा ही मुझको, 
ज़ब मरना था तब़ मर न सक़ा!
मै जींवन में कुछ न कर सक़ा!

Title: Jeevan ki jay ho || hindi life poetry


Ek aurat || hindi poetry

👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧

एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।

बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।

ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।

आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।

कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।

Title: Ek aurat || hindi poetry