
Ik geet likeya te fir mita dita
bas injh hi rahi ohdi aadat
mainu diwana bna le zindagi chon mita dita

Ik geet likeya te fir mita dita
bas injh hi rahi ohdi aadat
mainu diwana bna le zindagi chon mita dita
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।
Kehndi apne alfaaza vich na mera zikar kareyaa kar
Me khush haan aive na mera fikar kareyaa kar
apne dowa di kahani nu akhraan vich na jadheyaa kar
likh likh yaadan nu injh na kitaaban bhareyaa kar
ਕਹਿੰਦੀ ਅੱਪਣੇ ਅਲਫ਼ਾਜ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਮੇਰਾ ਜਿਕਰ ਕਰਿਆ ਕਰ
ਮੈਂ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ ਐਵੇਂ ਨਾ ਮੇਰਾ ਫਿਕਰ ਕਰੀਆ ਕਰ
ਅੱਪਨੇ ਦੋਵਾਂ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਨੂੰ ਅੱਖਰਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਜੜਿਆ ਕਰ
ਲਿਖ ਲਿਖ ਯਾਦਾਂ ਨੂੰ ਇੰਝ ਨਾ ਕਤਾਬਾਂ ਭਰਿਆ ਕਰ