इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Lok pagl sanu kehnde ne
Bol ehna de sunne kyu chuniye..!!
Asi dil lutayeya e tere te
Dass hor kise di kyu suniye..!!
ਲੋਕ ਪਾਗ਼ਲ ਸਾਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ
ਬੋਲ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਸੁਣਨੇ ਕਿਉਂ ਚੁਣੀਏ..!!
ਅਸੀਂ ਦਿਲ ਲੁਟਾਇਆ ਏ ਤੇਰੇ ‘ਤੇ
ਦੱਸ ਹੋਰ ਕਿਸੇ ਦੀ ਕਿਉਂ ਸੁਣੀਏ..!!

Oh dard hi ki jo aakhraan vich biyaan ho jawe
dard taan oh hai jo akhaan vich nazar aawe
te mehfelaan rulaa jawe