इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...

Meri rooh teri muskurahat se aise kaise jud gayi…
Mehsoos tak na hua humari Zindagi tumhari kab ho gayi…🙈
मेरी रूह तेरी मुस्कुराहट से ऐसे कैसे जुड़ गई
महसूस तक न हुआ हमारी ज़िंदगी तुम्हारी कब हो गई…🙈