इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Jhooth bol ke rishte judh taa sakde ne
par kadi nibhde nahi hunde
ਝੂਠ ਬੋਲ ਕੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਜੁੜ ਤਾਂ ਸਕਦੇ ਨੇ..
ਪਰ ਕਦੀ ਨਿਭਦੇ ਨਹੀ ਹੁੰਦੇ🥀..
