इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...

zindagi hundi saahan de naal
manzil mile raahan de naal
ijjat mildi zameer naal
pyar mile takdeer naal
ਜਿੰਦਗੀ ਹੁੰਦੀ ਸਾਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ,
ਮੰਜਿਲ ਮਿਲੇ ਰਾਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ
ਇਜੱਤ ਮਿਲਦੀ ਜਮੀਰ ਨਾਲ
ਪਿਆਰ ਮਿਲੇ ਤਕਦੀਰ ਨਾਲ।