इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
अभी मुश्किल है, कैसे बताऊ के दिल में क्या चल रहा है..
एक अजीब से उलझन में हूँ, दिल मेरा जैसे के जल रहा है..
ना जाने परेशानी की वजह है क्या, बेचैनी बड़ी अजब सी है..
ये खुद मेरी समझ से बाहर है, कुछ तो है जो खल रहा है..
बिता कल सबका होता है
कुछ दर्द भरा तो
कुछ खुशियो से भरा होता है
छोडके सारे गिले शिकवे
ए दोस्त तू आगे बड
खूशियो से भरा कल
आनेवाला है