इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Jante ho fir bhi anjan bnte ho
Puchhte ho tumhe kya pasand hai
Jawab khud ho, fir bhi sawal krte ho!❤
जानते हो फिर भी अनजान बनते हो
पूछते हो तुम्हे क्या पसन्द है
जवाब खुद हो, फिर भी सवाल करते हो!❤
Taqdeer toh wadh te samye toh phla kuj ne milda ,
Gal kismat de hundi koi sb paa k ve khoo lenda te koi sb khoo k ve sb paa lenda