इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Jad mel rooha da hunda e
rishte paak pawiter judhde ne
gal aap muhaare tur paindi
jad yaar sajjan nu milde ne
ਜਦ ਮੇਲ ਰੂਹਾ ਦਾ ਹੰਦਾ ਏ
ਰਿਸਤੇ ਪਾਕ ਪਵਿੱਤਰ ਜੁੜਦੇ ਨੇ
ਗੱਲ ਆਪ ਮੁਹਾਰੇ ਤੁਰ ਪੈਦੀ
ਜਦ ਯਾਰ ਸੱਜਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦੇ ਨੇ
