इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
Enjoy Every Movement of life!
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...
मेरी सारी रातें तुम्हारी, मेरा हर दिन तुम्हारा।
मेरी सारी बातें तुम्हारी, मेरा हर क्षण तुम्हारा।
प्यार की सारी नगमे तुम्हारी, मेरा कतरा – कतरा अब हुआ तुम्हारा।
जाहिर है अब ये प्यार मेरा, बाकी अब है फैसला तुम्हारा। – ईशान कुमार वत्स
Ardaas lafza naal nahi rooh naal hundi hai
Parmatma ohna di vi sunda hai jehre bol nahi sakde🙏❤
ਅਰਦਾਸ ਲਫ਼ਜ਼ਾਂ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਰੂਹ ਨਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
ਪਰਮਾਤਮਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵੀ ਸੁਣਦਾਂ ਹੈ ਜਿਹੜੇ ਬੋਲ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ 🙏❤