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Ik supna || Punjabi poetry || best poetry || Punjabi likhawat

Ik palla jeha mooh te kreya c
Khaure ki soch muskaundi c..!!
Hath dua de vich c khade kitte
Anmulla kuch pauna chahundi c..!!
Din chdeya sunehre rang warga
Hath dil te Bs tikaya c..!!
Jo dekh k akhan nam hoyia
Ik sunpna jeha menu aaya c..!!
Eh do jahan de Malik ne
Kuj esa khel rachaya c..!!
Ohde dar te hoyi qubool meri
mohobbat nu gale lgaya c..!!
Oh fad ishqe da pallrha jeha
Ohde dar te sees niwaya c..!!
Mera hath fad ohde hathan vich
Jiwe aap khuda ne fadaya c..!!
Rooh khushi naal c jhum gayi
Rabb khud milawan aaya c..!!
Oh khayal c Pak mohobbat da
Jinne do roohan nu milaya c..!!

ਇੱਕ ਪੱਲਾ ਜਿਹਾ ਮੂੰਹ ਤੇ ਕਰਿਆ ਸੀ
ਖੌਰੇ ਕੀ ਸੋਚ ਮੁਸਕਾਉਂਦੀ ਸੀ.!!
ਹੱਥ ਦੁਆ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸੀ ਖੜੇ ਕੀਤੇ
ਅਨਮੁੱਲਾ ਕੁਝ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਸੀ..!!
ਦਿਨ ਚੜ੍ਹਿਆ ਸੁਨਹਿਰੇ ਰੰਗ ਵਰਗਾ
ਹੱਥ ਦਿਲ ਤੇ ਬਸ ਟਿਕਾਇਆ ਸੀ..!!
ਜੋ ਦੇਖ ਕੇ ਅੱਖਾਂ ਨਮ ਹੋਈਆਂ
ਇੱਕ ਸੁਪਨਾ ਜਿਹਾ ਮੈਨੂੰ ਆਇਆ ਸੀ..!!
ਇਹ ਦੋ ਜਹਾਨ ਦੇ ਮਾਲਿਕ ਨੇ
ਕੁਝ ਐਸਾ ਖੇਲ ਰਚਾਇਆ ਸੀ..!!
ਓਹਦੇ ਦਰ ਤੇ ਹੋਈ ਕਬੂਲ ਮੇਰੀ
ਮੋਹੁੱਬਤ ਨੂੰ ਗਲੇ ਲਗਾਇਆ ਸੀ..!!
ਉਹ ਫੜ੍ਹ ਇਸ਼ਕੇ ਦਾ ਪੱਲੜਾ ਜਿਹਾ
ਓਹਦੇ ਦਰ ਤੇ ਸੀਸ ਨਿਵਾਇਆ ਸੀ..!!
ਮੇਰਾ ਹੱਥ ਫੜ੍ਹ ਓਹਦੇ ਹੱਥਾਂ ਵਿੱਚ
ਜਿਵੇਂ ਆਪ ਖੁਦਾ ਨੇ ਫੜਾਇਆ ਸੀ..!!
ਰੂਹ ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਸੀ ਝੂਮ ਗਈ
ਰੱਬ ਖੁਦ ਮਿਲਾਵਨ ਆਇਆ ਸੀ..!!
ਉਹ ਖਿਆਲ ਸੀ ਪਾਕ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦਾ
ਜਿੰਨੇ ਦੋ ਰੂਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾਇਆ ਸੀ..!!




Title: Ik supna || Punjabi poetry || best poetry || Punjabi likhawat

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Umar guzar di bewafa ke || bewafa HIndi story

उम्र सारी गुजर दी बेवफा प्यार में , रातों की नीद कुर्बान कर दी बेवफा प्यार में , हमने की थी मोहब्बत उम्र भर के सुकून के लिए,हालत कुछ यू बदले मेरे अब लगता है क्यूं गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में , अब हाल ऐसा है मेरा दिल में दर्द , आखों में आशू हाथ में ग्लास शराब का, जब बढ़ जाता है दिल में आलम तनाहियो का हाथों में होती है ग्लास शराब की, महफिलों में जब उठती है बेफायी की बाते उन बातो में जिक्र तेरी बेवफाई का होता जरूर है , कहते है सब की बांदा तो था काम का कर दिया खराब इश्क ने , क्यू गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में ।
सबने रोका था की मत करना ये दोस्त तू मोहब्बत यह मिलती वफा के बदले बेवफाई हमने न मानी बात किसी की करली मोहब्बत तुझ सनम हरजाई से , क्यू गुजर दी हमने उम्र बेवफा प्यार में । गम के सिवा कुछ न मिला ये दोस्त तेरी मोहब्बत में , अब रही नही हिम्मत अब और गम सहने की कर रहे कुर्बा खुद को बेवफा प्यार में , जब जनाजा निकले गा तेरी गली से मेरे महबूब आखों में आशू तेरे होगा जरूर , क्यू कर दी बेवफाई सोचे गी जरूर, जब भी तू सोएगी किसी गैर की बाहों में क्यूं की बेवफाई सोचे गी जरूर , मेरे मरने के बाद सब की जुबा पे होगा मेरा नाम हर जगह चर्चा होगा तेरी बेवफाई का कैसे एक आशिक ने उम्र गुजर दी बेवफा प्यार में ।

Title: Umar guzar di bewafa ke || bewafa HIndi story


Kisaan ki zindagi || किसान की जिंदगी

तन पर खराब पुराने कपड़े होते हैं,
पैर मिट्टी में पूरी तरह सने होते हैं,
कड़ी सुलगती धूप में काम करते हैं जो,
ये कोई और नहीं सिर्फ किसान है वो,

धरती की छाती हल से चीर देते हैं,
हमारे लिए अन्न की फसल उगा देते हैं,
किसान अपनी फसल से बहुत प्यार करते हैं,
गरमी, सरदी, बरसात में जूझते रहते हैं,

मान लेते हैं की किसान बहुत गरीब होते हैं,
हमारी थाली में सजा हुआ खाना यही देते हैं,
इनके बिना हमें अनाज कभी मिल नहीं पाता,
दौलत कमा लेते पर कभी पेट न भर पाता,

भूमि को उपजाऊ बनाने वाले किसान है,
हमारे भारत का मान, सम्मान और शान हैं,
ये सच्ची बात सब अच्छे से जानते हैं,
किसान को हम अपना अन्नदाता मानते हैं,

हम ये बात क्यों नहीं कभी सोचते हैं,
गरीब किसान अपना सब हमें देते हैं,
हम तो पेट भर रोज खाना खा लेते हैं,
किसान तो ज्यादतर खाली पेट सोते हैं,

                 तरुण चौधरी

Title: Kisaan ki zindagi || किसान की जिंदगी