Kohn ton darda aa
taahi ijhaar ni karda
bhawe ik tarfa hi sahi
par pyaar saaha ton vadhere karda aa
ਖੋਹਣ ਤੋਂ ਡਰਦਾ ਆ,
ਤਾਹੀਂ ਇਜ਼ਹਾਰ ਨੀ ਕਰਦਾ,
ਭਾਵੇਂ ਇੱਕ ਤਰਫਾ ਹੀ ਸਹੀ,
ਪਰ ਪਿਆਰ ਸਾਹਾਂ ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਕਰਦਾ ਆ
Kohn ton darda aa
taahi ijhaar ni karda
bhawe ik tarfa hi sahi
par pyaar saaha ton vadhere karda aa
ਖੋਹਣ ਤੋਂ ਡਰਦਾ ਆ,
ਤਾਹੀਂ ਇਜ਼ਹਾਰ ਨੀ ਕਰਦਾ,
ਭਾਵੇਂ ਇੱਕ ਤਰਫਾ ਹੀ ਸਹੀ,
ਪਰ ਪਿਆਰ ਸਾਹਾਂ ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਕਰਦਾ ਆ
Ki khateyaa ve asi pyaar karke
akhaan tere naal yaara ve me chaar karke
tainu diti e jubaan aakhri saah tak karunga pyaar
preet bhawe bhulegi tu ko ikraar karke
ਕੀ ਖੱਟਿਆ ਵੇ ਅਸੀ ਪਿਆਰ ਕਰਕੇ
ਅੱਖਾਂ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਯਾਰਾਂ ਵੇ ਮੈਂ ਚਾਰ ਕਰਕੇ
ਤੈਨੂੰ ਦਿੱਤੀ ਏ ਜੁਬਾਨ ਆਖਰੀ ਸਾਹ ਤੱਕ ਕਰੂਗਾ ਪਿਆਰ
ਪ੍ਰੀਤ ਭਾਵੇਂ ਭੁੱਲਗੀ ਤੂੰ ਕੌਲ ਇਕਰਾਰ ਕਰਕੇ
ਭਾਈ ਰੂਪਾ
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I