
Jiwe pani vich boonda ovein ikk-mikk ho jayiye..!!

उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं
ਅਸੀਂ ਹੀ ਪਾਗਲ ਸੀ
ਜੋ ਓਹਨਾਂ ਦੇ ਕੀਤੇ timepasss ਨੂੰ ਪਿਆਰ ਸਮਝ ਬੈਠੇ
asin hi pagal c
jo ohna de kite timepass nu pyar samajh baithe