Zindagi nu inna v sasta na banao
ke do kaudi da insaan
ohde naal khed k chla jawe
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਐਨਾ ਵੀ ਸਸਤਾ ਨਾ ਬਣਾਓ
ਕਿ ਦੋ ਕੌੜੀ ਦਾ ਇਨਸਾਨ
ਉਹਦੇ ਨਾਲ ਖੇਡ ਕੇ ਚਲਾ ਜਾਵੇ
Zindagi nu inna v sasta na banao
ke do kaudi da insaan
ohde naal khed k chla jawe
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਐਨਾ ਵੀ ਸਸਤਾ ਨਾ ਬਣਾਓ
ਕਿ ਦੋ ਕੌੜੀ ਦਾ ਇਨਸਾਨ
ਉਹਦੇ ਨਾਲ ਖੇਡ ਕੇ ਚਲਾ ਜਾਵੇ
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”
o zindagi cho kadh gai e me khayaala cho na kadh payeyaa
kaisa e ishq chandra bhul ke v na bhul paaeya
ਔ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚੋਂ ਕੱਡ ਗੲੀ ਏ ਮੈਂ ਖਿਆਲਾਂ ਚੋ ਨਾ ਕੱਡ ਪਾਇਆ
ਕੈਸਾ ਏ ਇਸ਼ਕ ਚੰਦਰਾ ਭੁੱਲ ਕੇ ਵੀ ਨਾ ਭੁੱਲ ਪਾਇਆ