इंतजार मैंने कभी उसका किया नहीं, वो ही थी जो करती थी.. मैं डरता था दुनिया से, वो एक ही मुझसे डरती थी.. ऐसा नहीं के खौफ में थी, बस प्यार वो मुझसे करती थी.. वो एक ही थी, वो एक ही है, जो मेरे लिए बस मरती थी..
इंतजार मैंने कभी उसका किया नहीं, वो ही थी जो करती थी.. मैं डरता था दुनिया से, वो एक ही मुझसे डरती थी.. ऐसा नहीं के खौफ में थी, बस प्यार वो मुझसे करती थी.. वो एक ही थी, वो एक ही है, जो मेरे लिए बस मरती थी..

उनके बारे में सोचूं, तो सोच में सुबह से शाम करदूँ..
मेरी दोस्ती कुबूल है उन्हें, क्या ये ज़िक्र शरेआम करदूँ..
अभी कहदूँ या रुकुं थोडा, जो मेरे दिल में बातें हैं..?
मेरा बस चले तो अपनी मुस्कान का कुछ हिस्सा, मैं उनके नाम करदूँ..