
par bina byan kitteya..!!

नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया, मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया। फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर, गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया। सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो, नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया। कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत, सद्भावना के फूल पिरोता चला गया। जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं, विश्वास अपने आप पर होता चला गया। अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां, मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया। उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग, हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...
Meri swer bdi sohni hundi aa
Jad rajai cho mooh bahr kadda
Meri maa chaa lai ke khadi hundi aa❤
ਮੇਰੀ ਸਵੇਰ ਸੋਹਣੀ ਬੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ”
ਜਦ ਰਜਾਈ ਚੋ ਮੂੰਹ ਬਾਹਰ ਕੱਢਾ”
ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਚਾਹ ਲੈਕੇ ਖੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ।❤️