Ishq ka ilam sikhne gya tha
aur logon ke chehre padhnaa sikh kar lautaa hoon
ईशक का ईलम सिखने गया था
और लोगों के चेहरे पढ़ना सिख कर लौटा हूं
Ishq ka ilam sikhne gya tha
aur logon ke chehre padhnaa sikh kar lautaa hoon
ईशक का ईलम सिखने गया था
और लोगों के चेहरे पढ़ना सिख कर लौटा हूं
माँ-बाप की उम्मीदों पर
खरा उतर गया ,
इतना आगे बढ़ा, पलटा
तो उसका साथ छुट गया।
अब फर्क नहीं पड़ता जनाब
कौन साथ है?, कौन पास है?
हजारों लोग मिले हैं मुझसे दिन में
पर वो पगली आज भी खास है।
क्या नजारा था मित्र
मैंने बर्बादी खुबसूरत देखी,
तेरे बिन मर जाऊँगी
हाय!………………
ऐसी उसकी आंखो में तड़प देखी।
दिल्लगी थी, मेरे दोस्त
कोई झूठा फसाना नहीं,
आज भी दिल कहता है
खबरदार,……………
उसके सिवा किसी से दिल लगाना नहीं।
दिल देता है हौसला, मेरे दोस्त
तभी आज भी, उसका इंतजार करूँ
कही मिल जाए दो पल के लिए
तो पगली से दिल भरके बातें करूँ।
use ye kaun batalaaye… use ye kaun samajhae ki,
khaamosh rahane se taalluk toot jaate hai…
उसे ये कौन बतलाये… उसे ये कौन समझाए कि,
खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है…