saanu taa pyaar de do lafaz v nahi naseeb
par badnaam iss tarah haa asi
jis tarah eh ishq saade toh hi shuru hoeyaa howe
ਸਾਨੂੰ ਤਾਂ ਪਿਆਰ ਦੇ ਦੋ ਲਫਜ਼ ਵੀ ਨਹੀਂ ਨਸੀਬ
ਪਰ ਬਦਨਾਮ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹਾਂ ਅਸੀਂ
ਜਿਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਇਸ਼ਕ ਸਾਡੇ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਹੋਵੇ..!
saanu taa pyaar de do lafaz v nahi naseeb
par badnaam iss tarah haa asi
jis tarah eh ishq saade toh hi shuru hoeyaa howe
ਸਾਨੂੰ ਤਾਂ ਪਿਆਰ ਦੇ ਦੋ ਲਫਜ਼ ਵੀ ਨਹੀਂ ਨਸੀਬ
ਪਰ ਬਦਨਾਮ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹਾਂ ਅਸੀਂ
ਜਿਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਇਸ਼ਕ ਸਾਡੇ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਹੋਵੇ..!
Dard dene wala bhi bhut kuch sikhakar jata hai
Or agar dard mein likhna sikh lo to vo dwa ban jata hai..!!
दर्द देने वाला भी बहुत कुछ सिखाकर जाता है
और अगर दर्द में लिखना सीख लो तो वो दवा बन जाता है..!!
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——