पीपल का पेड़ है
इश्क़ कैसे करू
आप इतनी दूर हो
किस कैसे करू
peepal ka pedh hai
ishq kaise karu
aap itni door ho
kis kaise karu
❤️ Nagpal ❤️
पीपल का पेड़ है
इश्क़ कैसे करू
आप इतनी दूर हो
किस कैसे करू
peepal ka pedh hai
ishq kaise karu
aap itni door ho
kis kaise karu
❤️ Nagpal ❤️
शाम बीती और रात हुई, गमों की फिर बरसात हुई..
तुझे भुलने को फिर से जाम पिया, गलती फिर मेरे हाथ हुई..
फिर से बहक गए लफ्ज मेरे, लफ्जों पे फिर से दात हुई..
दिलजले थे वहां कई मुझ जैसे, उनकी भी इश्क में मात हुई..
वही एक तरह का हर किस्सा, इश्क की भी भला कोई जात हुई..
हर कहानी ख़ुशी से शुरू हुई, ख़तम आंसुओं के साथ हुई..
महफिल को छोड़ चले घर की ओर, तन्हाई से फिर मुलाकात हुई..
तेरी याद बढ़ गई हर जाम के साथ, भला ये भी कोई बात हुई..
