ਇਥੇ ਸਾਰੇ ਮਤਲਬ ਦੇ ਯਾਰ ਨੇਂ
ਜਦੋਂ ਤਕ ਪੈਸਾ ਓਹਦੋਂ ਤੱਕ ਪਿਆਰ ਨੇਂ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਮਰਜ਼ੀ ਕਰਲੋ ਕਿਸੇ ਲਈ
ਐਹਣਾ ਲਈ ਦਿਲ ਦੇ ਸਾਫ਼ ਬੰਦੇ ਬੇਕਾਰ ਨੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
ਇਥੇ ਸਾਰੇ ਮਤਲਬ ਦੇ ਯਾਰ ਨੇਂ
ਜਦੋਂ ਤਕ ਪੈਸਾ ਓਹਦੋਂ ਤੱਕ ਪਿਆਰ ਨੇਂ
ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਮਰਜ਼ੀ ਕਰਲੋ ਕਿਸੇ ਲਈ
ਐਹਣਾ ਲਈ ਦਿਲ ਦੇ ਸਾਫ਼ ਬੰਦੇ ਬੇਕਾਰ ਨੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
गिरा तो फ़िर कभी,उठा ना मिला
बंदों का हुज़ूम था,खुदा ना मिला
ज़िस्म ना मिले,तो क्या हुआ यार
वो दिल से कभी, जुदा ना मिला
परिंदों के जैसा था, इश्क़ उसका
कोई वादा, कोई वास्ता ना मिला
ऐसे हुआ दिल पर,कब्ज़ा उसका
धड़कनों को भी, रास्ता ना मिला
उसके शाहपरस्त भी हैं,बादशाह
कोई भी पत्थर,तरास्ता ना मिला
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।