
Sachii dua hai meri..!!
Jaan meri jad jawe
jawe baahan ch teri..!!

महर-ओ- वफ़ा की शमआ जलाते तो बात थी
इंसानियत का पास निभाते तो बात थी
जम्हूरियत की शान बढ़ाते तो बात थी
फ़िरक़ा परस्तियों को मिटाते तो बात थी
जिससे कि दूर होतीं कुदूरत की ज़ुल्मतें
ऐसा कोई चराग़ जलाते तो बात थी
जम्हूरियत का जश्न मुबारक तो है मगर
जम्हूरियत की जान बचाते तो बात थी
ज़रदार से यह हाथ मिलाना बजा मगर
नादार को गले से लगाते तो बात थी
बर्बाद होने का तो कोई ग़म नहीं मगर
अपना बनाके मुझको मिटाते तो बात थी
हिंदुस्तान की क़सम ऐ रेख़्ता हूँ ख़ुश
पर मुंसिफ़ी की बात बताते तो बात थी
dil me bujhi aag fir se bhadhkaa rahe ho kyu
tan se toh tum door ho fir yaado me aa rahe ho kyu
ਦਿਲ ਮੇ ਬੁਝੀ ਆਗ ਫਿਰ ਸੇ ਭੜਕਾਅ ਰਹੇ ਹੋ ਕਿਉ,,
ਤਨ ਸੇ ਤੋਹ ਤੁਮ ਦੂਰ ਹੋ ਫਿਰ ਯਾਦੋ ਮੈ ਆ ਰਹੇ ਹੋ ਕਿਉ ।