जब तुम्हारी याद आए, हम चाँद को निहार लेते हैं,
जो बातें तुमसे ना कह पाए, वे उसको सुनाने लगते हैं,
लगता है, कोई पुराना रिश्ता तुमसे,
जब भी तुमसे मिलते हैं, हम मुस्कुराने लगते हैं।
जब तुम्हारी याद आए, हम चाँद को निहार लेते हैं,
जो बातें तुमसे ना कह पाए, वे उसको सुनाने लगते हैं,
लगता है, कोई पुराना रिश्ता तुमसे,
जब भी तुमसे मिलते हैं, हम मुस्कुराने लगते हैं।
कुछ हसीन रास्तों पर,
जब हाथ पकड़ कर हम निकले थे,
तुम करीब होकर भी गुज़र गए,
मानों तड़पकर दम निकले थे,
अब क्या जिंदगी से गुज़ारिश करूं,
यादों में उसकी मय थोड़ी बाक़ी है,
कोई जहां शायद ऐसा भी होगा,
जहां वो वक्त अब भी बाक़ी है...
चल कर देखेंगे वहां एक रोज़ हम भी,
वो वही जिंदगी है, या साक़ी है,
देख ले साक़ी ज़रा फिर से मयखाने में,
सब ख़त्म हो गई या शराब थोड़ी बाक़ी है...
shayer taa nahi haa me
bas do akhar bewafai de likhda haa
khaake dhokhe ishq de raah te
me bas jina sikda haa
ਸ਼ਾਇਰ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਮੈਂ
ਬੱਸ ਦੋ ਅਖਰ ਬੇਵਫ਼ਾਈ ਦੇ ਲਿਖਦਾ ਹਾਂ
ਖਾਕੇ ਧੋਖੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਰਾਹ ਤੇ
ਮੈਂ ਬੱਸ ਜਿਨਾ ਸਿਕਦਾ ਹਾਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ