जब तुम्हारी याद आए, हम चाँद को निहार लेते हैं,
जो बातें तुमसे ना कह पाए, वे उसको सुनाने लगते हैं,
लगता है, कोई पुराना रिश्ता तुमसे,
जब भी तुमसे मिलते हैं, हम मुस्कुराने लगते हैं।
जब तुम्हारी याद आए, हम चाँद को निहार लेते हैं,
जो बातें तुमसे ना कह पाए, वे उसको सुनाने लगते हैं,
लगता है, कोई पुराना रिश्ता तुमसे,
जब भी तुमसे मिलते हैं, हम मुस्कुराने लगते हैं।
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…
Poh da mahina ate raatan kaliyan ch
Asi vi dubb gye akhan surme valiyan ch
Mein keha, “acha ji, sat shri akaal!
Kehndi baith sardara! Ghutt Chaa taan pi lyiye piyaliyan ch 😍
ਪੋਹ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਅਤੇ ਰਾਤਾਂ ਕਾਲੀਆਂ ‘ਚ
ਅਸੀ ਵੀ ਡੁੱਬ ਗਏ ਅੱਖਾਂ ਸੁਰਮੇ ਵਾਲੀਆਂ ‘ਚ
ਮੈ ਕਿਹਾ ,”ਅੱਛਾ ਜੀ , ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਆਕਾਲ !
ਕਹਿੰਦੀ ਬੈਠ ਸਰਦਾਰਾ! ਘੁੱਟ ਚਾਅ ਤਾਂ ਪੀ ਲਈਏ ਪਿਆਲੀਆਂ ‘ਚ 😍