
Khaure mukk jawe reet szawan di..!!
Taklif den ta de zehar pila
Je kadar nahi mere chawan di..!!

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
Ham toh nadaan parinde he sahib
aasmaan me udhna jante hai
pyar, ishq se vaasta nahi hamaara
inhe toh fakat aansuaan ka sailaab maante hai
हम तो नादान परिन्दे हैं साहेब,
आसमान में उडना जानते हैं,
प्यार, इश्क से वास्ता नहीं हमारा,
इन्हे तो फकत् आँसुओं का सैलाब मानते हैं।
– विक्रम