
Khaure mukk jawe reet szawan di..!!
Taklif den ta de zehar pila
Je kadar nahi mere chawan di..!!

मैं तुम्हे तुमसे ज्यादा जानता हूं,
मैं तुम्हारे दिल का हर किनारा जानता हूं,
जो कहते नहीं वो आंखों से बता देते हो,
मैं तुम्हारी नजरों का हर इशारा जानता हूं
जानता हूं हाथ थाम कर चलना पसंद है तुम्हे,
फिर कांधे में सिर रखकर बैठना पसंद है तुम्हे,
पानी में लिखकर नाम अक्सर मिटा देते हो,
मेरे साथ रहने का तुम्हारा हर बहाना जानता हूं,
मैं तुम्हारे दिल का हर किनारा जनता हूं...
Jab aap khwab bunte hoo.
Tab aap apna aap chunte ho..
Mehnat ke liye..
Uncha udne ke liye..
जब आप खवाब बुनते हो।
तब आप अपना आप चुनते हो।
मेहनत के लिऐ।
ऊचा उडने के लिऐ।