tainu mere to koi kho ni si sakda
je teri marzi na hundi
ਤੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਕੋਈ ਖੋਹ ਨੀ ਸੀ ਸਕਦਾ
ਜੇ ਤੇਰੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾ ਹੁੰਦੀ
tainu mere to koi kho ni si sakda
je teri marzi na hundi
ਤੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਤੋਂ ਕੋਈ ਖੋਹ ਨੀ ਸੀ ਸਕਦਾ
ਜੇ ਤੇਰੀ ਮਰਜ਼ੀ ਨਾ ਹੁੰਦੀ
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।
मैं खिल नहीं सका कि मुझे नम नहीं मिला,
साक़ी मिरे मिज़ाज का मौसम नहीं मिला।🤎