
Sheeshe ute dhorraan jamiyaankandaan jarri jande ne
jhalle loki
jildaan sanb rahe ne varke parri jande ne

Sheeshe ute dhorraan jamiyaankandaan jarri jande ne
jhalle loki
jildaan sanb rahe ne varke parri jande ne
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
Maana Ki Tum Lafzon Ke Baadshah Ho Lekin,
Hum Bhi Khamoshiyon Par Raaj Karte Hain!